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Intelligence is a faculty unique to humans alone. So, it is essential to imbibe our intellect with true knowledge, which will help purify our intentions and actions. Subsequently, we begin to grow from within and reach our true potential. Wisdom blog is aimed to provide such true knowledge, which will help us to realize the purpose of our life and move forward in our spiritual endeavour.

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कठिन परिस्थितियों का सामना करने के उपाय

February 28th, 2022|Categories: Other|

समस्यायें सबके जीवन में आती हैं। कोई उनके सामने रुक जाता है और कोई उनको सीढ़ी बना कर अधिक उन्नति कर लेता है। अतः समस्याओं के प्रति हम सकारात्मक मनोभाव रखें, जिससे हम उनसे लाभ ...

Story of Vidura’s Past Life and Sage Mandavya’s Curse

February 26th, 2022|Categories: Vedic Tales|

धर्मो र्विदुररूपेण शापात् तस्य महात्मनः ⁠। माण्डव्यस्यार्थतत्त्वज्ञः कामक्रोधविवर्जितः ⁠। महात्मा माण्डव्यके शापसे साक्षात् धर्मराज ही विदुररूपमें उत्पन्न हुए थे। वे अर्थतत्त्वके ज्ञाता और काम-क्रोधसे रहित थे। It was Dharmaraj who was born as Vidura, as ...

जीवन को व्यर्थ न गँवायें

January 16th, 2022|Categories: Other|

संसार मे सब अपने अपने स्वार्थ के कारण स्नेह करते हैं।हम कौन हैं, कहाँ से आये हैं, कहाँ जाना है ? हम शरीर हैं या आत्मा हैं ? इन सब प्रश्नों पर गंभीरता से विचार ...

Power of Visualization

January 10th, 2022|Categories: Other|

As soon as we take the name of a friend, colleague, or an object the first thing that comes to our mind is their image. Children's Books are filled with colorful illustrations and pictures. This ...

Nahusha’s Tale of Pride and Deposition from Heaven

December 6th, 2021|Categories: Vedic Tales|Tags: |

मूर्खस्य पञ्च चिन्हानि गर्वो दुर्वचनं तथा। क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः॥ There are five signs of fools - Pride, abusive language, anger, stubborn arguments, and disrespect towards other people's opinions. Pride is considered as one of the ...

सांसार में कार्य करते हए भक्ति कैसे करें

December 1st, 2021|Categories: Spirituality|Tags: |

उपरोक्त शीर्षक के संदर्भ में वेद कहता है कि बंधन और मोक्ष का कारण मन की अवस्था अर्थात मनसा या भाव के अनुसार होता है न कि बाह्य इन्द्रियों के कार्य आंख, कान, जिव्हा आदि ...

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